कान्हा की नगरी के 10 पावन और दिव्य तीर्थ स्थलकान्हा की नगरी के 10 पावन और दिव्य तीर्थ स्थल

क्या आपने कभी Mathura की उन गलियो का सुकून महसूस किया है जहा हर तरफ बस राधे राधे की गूंज होती है ? जो मन को बहुत ही आनंदित करती है | इस पोस्ट मे हम Mathura के उन मुख्य मंदिरो और छुपी हुई जगहो के बारे मे जानेगे जो आपकी ट्रिप को यादगार बना देगी  |

अगर आप अपनी फैमिली या फ्रेंड्स के साथ Mathura घुमने का सोच रहे है तो आप बिल्कुल सही जगह आए , इस लेख मे हम Mathura के उन 10 मुख्य मंदिरो और छुपी हुई दिव्य जगहो के बारे मे विस्तार से जानेगे, जो न केवल आपकी यात्रा को यादगार बनाएगी, बल्कि आपको ब्रज की असली संस्कृति से भी रूबरू कराएंगी।

मेरा वादा है कि इस लेख को पढने के बाद आप यहा से खुश होकर और सही जानकारी लेकर जायेगे मैने इंटरनेट पर उपलब्ध सैकड़ो यात्रियो के अनुभवो का अध्ययन किया है, ताकि मै आप तक सही जानकारी पहुचा सकू जो वास्तव मे आपके समय और भक्ति को सार्थक बनाए।

Table of Contents

Mathura के 10 दिव्य तीर्थ : जहा कण कण मे विराजते है साक्षात श्री कृष्ण

1. श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर: जहा हुआ था दिव्य अवतार

श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर: जहा हुआ था दिव्य अवतार
श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर: जहा हुआ था दिव्य अवतार

Mathura की यात्रा तब तक अधूरी है जब तक आप उस स्थान के दर्शन न कर ले, जहा स्वयं भगवान विष्णु ने श्री कृष्ण के रूप मे अवतार लिया था। यह मंदिर उसी ऐतिहासिक कारागार के ऊपर बना है जहा कंस ने माता देवकी और वासुदेव जी को बंदी बनाया था। 

यहा का मुख्य आकर्षण गर्भगृह है, जो वह वास्तविक स्थान माना जाता है जहा कान्हा का जन्म हुआ था। पत्थर की उन दीवारो को देखकर आज भी द्वापर युग के उस दृश्य की अनुभूति होती है। इसके पास ही भव्य भागवत भवन है, जिसकी नक्काशी और दीवारो पर लिखे, गीता के श्लोक आपको मंत्रमुग्ध कर देगे। यहा की शांति और भक्तो का राधे राधे जप आपके मन के सारे तनाव को दूर कर देता है।

  • स्थान: डीग गेट, मथुरा, उत्तर प्रदेश।
  • सुबह: प्रातः 5:00 बजे से दोपहर 12:00 और शाम: दोपहर 4:00 बजे से रात 9 :30 बजे तक।

2. श्री द्वारकाधीश मंदिर: ब्रज के राजा का भव्य दरबार

 श्री द्वारकाधीश मंदिर: ब्रज के राजा का भव्य दरबार
श्री द्वारकाधीश मंदिर: ब्रज के राजा का भव्य दरबार

Mathura के विश्राम घाट के पास स्थित यह मंदिर अपनी अद्भुत राजस्थानी नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। यहा कान्हा को द्वारकाधीश यानी द्वारका के राजा के रूप मे पूजा जाता है। काले संगमरमर की प्रतिमा और मंदिर के भीतर की चित्रकारी आपको द्वापर युग की याद दिला देती है।

  • स्थान:विश्राम घाट के पास,राजा धीरज बाजार रोड, Mathura, उत्तर प्रदेश 
  • समय: सुबह 6:30 से दोपहर 1:00 और शाम 5 :00 से 9 :30  बजे तक।
  • मुख्य विशेषताए : Mathura की सच्ची भावना का अनुभव करने के लिए होली, दिवाली और जन्माष्टमी जैसे त्यौहारो के दौरान जाए |

3. राधा वल्लभ मंदिर: जहा भक्ति ही शक्ति है

राधा वल्लभ मंदिर: जहा भक्ति ही शक्ति है
राधा वल्लभ मंदिर: जहा भक्ति ही शक्ति है

वृंदावन का यह प्राचीन मंदिर हित हरिवंश महाप्रभु द्वारा स्थापित किया गया था। यहा श्री राधा और कृष्ण के एकात्म स्वरूप की पूजा होती है। इस मंदिर की खासियत यह है कि यहा कोई अलग से राधा रानी की मूर्ति नही है, बल्कि ठाकुर जी के पास एक गद्दी रखी होती है जो राधा जी की उपस्थिति का प्रतीक है। यह मंदिर राधा और कृष्ण की पवित्र और आध्यात्मिक भक्ति का प्रतीक है|

  • स्थान: वृंदावन जिला Mathura राज्य उत्तर प्रदेश
  • समय: सुबह 5:00 से दोपहर 12:00 और शाम 6:00 से रात 9:00 बजे तक।
  • मुख्य विशेषताए: : मूर्ति को बहुत पवित्र माना जाता है |

4. विश्राम घाट: यमुना जी का पावन किनारा

विश्राम घाट: यमुना जी का पावन किनारा
विश्राम घाट: यमुना जी का पावन किनारा

यह Mathura का सबसे प्रमुख घाट है। कहा जाता है कि कंस का वध करने के बाद भगवान कृष्ण ने यही विश्राम किया था। यहा की शाम की यमुना आरती एक ऐसा अलौकिक दृश्य पेश करती है जिसे देखकर मन को असीम शांति मिलती है। यहा नौका विहार का आनंद भी लिया जा सकता है।

  • स्थान:  यह मथुरा के मध्य में द्वारकाधीश मंदिर के समीप यमुना के किनारे स्थित है।
  • विशेष: शाम 7:00 बजे की आरती कभी मिस न करे।

5. बिरला मंदिर : ज्ञान का स्तंभ

 बिरला मंदिर : ज्ञान का स्तंभ
बिरला मंदिर : ज्ञान का स्तंभ

मथुरा का प्रसिद्ध बिरला मंदिर, जिसे गीता मंदिर  के नाम से भी जाना जाता है, मथुरा वृंदावन मार्ग पर स्थित है। Mathura वृंदावन मार्ग पर स्थित यह मंदिर लाल बलुआ पत्थर से बना एक आधुनिक चमत्कार है। मंदिर के स्तंभो पर पूरी श्रीमद्भागवत गीता लिखी गई है। यहा का शांत वातावरण और सुंदर बगीचे परिवार के साथ समय बिताने के लिए सबसे उत्तम है।

  • स्थान: मथुरा वृंदावन रोड, मथुरा, उत्तर प्रदेश।
  • समय: सुबह 5:00 से दोपहर 12:00 और दोपहर 2:00 से रात 8:00 बजे तक।

6. मीराबाई मंदिर: अनन्य प्रेम की मिसाल

मीराबाई मंदिर: अनन्य प्रेम की मिसाल
मीराबाई मंदिर: अनन्य प्रेम की मिसाल

यह मंदिर उस महान कवयित्री और भक्त मीराबाई को समर्पित है, जिन्होने अपना पूरा जीवन कृष्ण भक्ति मे अर्पित कर दिया था। यहा की सादगी और भक्तिमय वातावरण आपको भावुक कर देगा। यह स्थान सिखाता है कि कृष्ण को पाने के लिए केवल सच्ची पुकार की आवश्यकता है।

  • स्थान: निधिवन के पास, शाहजी मंदिर के पीछे वाली गली, वृन्दावन, मथुरा।
  • समय: सुबह 5:00 से दोपहर 1:00 और  शाम 4:00 से रात 8:45 बजे तक।

7. श्री नंद यशोदा भवन 

 श्री नंद यशोदा भवन 
श्री नंद यशोदा भवन 

नंद गाँव मे स्थित यह वह स्थान है जहा कान्हा का बचपन बीता था। यहा माँ यशोदा और नंद बाबा का वह घर है जहा बाल कृष्ण की लीलाओ की गूँज आज भी महसूस होती है। यहा की ऊँची पहाड़ी से पूरे ब्रज का नजारा बेहद खूबसूरत दिखता है।

  • स्थान: गोकुल (मथुरा) में यमुना नदी के तट पर स्थित है।
  • समय: सुबह 5:00 से दोपहर 2:00 और शाम 4:00 से रात 9:00 बजे तक।

8. इस्कॉन मंदिर 

 इस्कॉन मंदिर 
इस्कॉन मंदिर 

वृंदावन का श्री कृष्ण बलराम मंदिर (इस्कॉन) अपनी भव्यता और विदेशी भक्तो की अटूट श्रद्धा के लिए जाना जाता है। यहा का कीर्तन इतना प्रभावशाली होता है कि आप खुद को झूमने से नही रोक पाएंगे। यहा की सफाई और व्यवस्था देखने लायक होती है।

  • स्थान: रमन रेती, वृंदावन, मथुरा, उत्तर प्रदेश।
  • समय: सुबह 4:30 से दोपहर 1:00 और शाम 4:30 से रात 9:00  बजे तक।

9. कुसुम सरोवर

कुसुम सरोवर
कुसुम सरोवर

गोवर्धन परिक्रमा के मार्ग मे स्थित यह सरोवर अपनी भव्य छतरियो और शांत जल के लिए प्रसिद्ध है। कहते है राधा रानी यहा कान्हा से मिलने के बहाने फूल चुनने आती थी। शाम के समय इस सरोवर का प्रतिबिंब  फोटोग्राफी के लिए सबसे अच्छा है।

  • स्थान: यह गोवर्धन में राधा कुंड से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
  • समय: प्रतिदिन सुबह 6:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक |

10. राधा कुंड और श्याम कुंड

माना जाता है कि इन कुंडो का निर्माण स्वयं राधा रानी और श्री कृष्ण ने किया था। गोवर्धन पर्वत की तलहटी मे स्थित ये कुंड दुनिया भर के वैष्णव भक्तो के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। यहा स्नान करना साक्षात राधा कृष्ण की कृपा पाने के समान माना जाता है।

  • स्थान: गोवर्धन, मथुरा |
  • समय: 24/7 खुला रहता है।
  • सर्वोत्तम समय: सुबह 5 बजे से 9 बजे तक और शाम 4 बजे से 7 बजे तक।

Mathura यात्रा से जुड़े मुख्य सवाल 

1. Mathura घूमने का सबसे सही समय कौन सा है? 

यहा घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच है, जब मौसम सुहावना रहता है।

2. Mathura के दर्शन के लिए कितने दिन काफी है? 

Mathura और इसके आस पास के प्रमुख मंदिरो को देखने के लिए 2 से 3 दिन का समय पर्याप्त है।

3. Mathura का सबसे प्रसिद्ध प्रसाद और खाना क्या है? 

मथुरा के पेड़े और सुबह की खस्ता कचोरी जलेबी यहा का सबसे मशहूर स्वाद है।

4. क्या मंदिरो के अंदर मोबाइल ले जा सकते है? 

जन्मभूमि जैसे मुख्य मंदिरो मे मोबाइल और कैमरा ले जाना सख्त मना है, इन्हे बाहर लॉकर मे जमा करना पड़ता है।

5. Mathura से वृंदावन की दूरी कितनी है? 

Mathura से वृंदावन मात्र 10 से 12 किलोमीटर की दूरी पर है, जहा आप ऑटो या ई रिक्शा से आसानी से जा सकते है।

शुभ संदेश

Mathura मात्र एक शहर नही, बल्कि श्रद्धा और शांति का वह केंद्र है जहा पहुचते ही मन के सारे विकार दूर हो जाते है। इस लेख मे हमने जाना कि कैसे आप श्री कृष्ण जन्मभूमि से लेकर कुसुम सरोवर जैसे 10 पावन स्थलो के दर्शन कर अपनी इस यात्रा को सफल बना सकते है। यदि आप भी भागदौड़ भरी जिंदगी से ब्रेक लेकर सुकून की तलाश मे है तो इंटरनेट की रिसर्च और भक्तो के अनुभवो के आधार पर बनाया गया यह मार्गदर्शक आपकी यात्रा को सुगम और व्यवस्थित बनाने का सबसे सटीक समाधान है।

तो देर किस बात की? इस पावन नगरी की मिट्टी को माथे से लगाने की योजना आज ही बनाए अगर आपको यह जानकारी पसंद आई हो, तो इसे अपने उन मित्रों और परिवार के सदस्यो के साथ शेयर करे जो जल्द ही Mathura जाने का विचार कर रहे है। साथ ही, कमेंट मे जय श्री कृष्णा लिखना न भूले!

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By Saumya Srivastava

उत्तर प्रदेश दर्शन: जहाँ धर्म, संस्कृति और इतिहास का संगम होता है। मै आपको ले चलती हूँ उत्तर प्रदेश के पावन तीर्थो, भव्य मंदिरों और अनकहे ऐतिहासिक गलियारों के सफर पर। आइए, मेरे साथ अनुभव करे यूपी की असली विरासत।

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